Tuesday, October 12, 2010

प्रेरणा स्त्रोत ...................


पथरीले पथ पर चलते चलते ,पांवो ने सीख लिया
जीवन पथ पर गिरते गिरते, राही ने मंजिल जीत लिया
संग्राम ज़माने का था, या युद्ध हमारे दिल का
हर विपदा से लडते लडते ,बांहों ने लड़ना सीख लिया

Wednesday, September 22, 2010

कुछ फिर दिल से .................


हम तो अपने दर्द के फ़साने पढते थे ;
शायद ही कभी इश्क की चर्चा करते थे;
किसी की मुस्कराहटो का कुछ हुआ असर ऐसा ;
कि अब तो सिर्फ परवाने इश्क ही गाते नजर आने लगे.........................

धर्म से

तुम कहते हो की हम हिन्दू मुस्लिम भेद करते है ;
जरा नजर उठाओ धर्म के ठेकेदारों ;
हम कुरान
वो वेद पढ़ते है
ये साम्प्रदायिकता तुम नेताओ के चोचले है
हम तो दीवाली में अली ;
रमजान में राम देखते है

इश्क की गलियों से


इश्क की गलियों की सर फरमाइए ;
वक्त की कमी का मत ख्याल कीजिये;
जीने के लिए तो वक्त तो बुत है जनाब ;
बस जनाजे से पहले सेहरे का इंतजाम कीजिये .................

Thursday, November 12, 2009

हमारा प्रेरणा स्त्रोत

लोग कहते है कि माजी* इतिहास बनता है।
लेकिन हम कहते है कि मेरा माजी प्रेरणा और एक आश बनता है॥
*माजी का तत्पर्य है बीता हुआ कल

Thursday, September 17, 2009

भारत :बदली आज की तस्वीर

"भारत " का शाब्दिक अर्थ होता है भा से रत यानि प्रकाशवान या चमक से परिपूर्ण।
किँतु आज चमक विलुप्त हो रही है हम कहाँ जा रहे है ये प्रश्न आज विचारणीय है,आज का युवा ध्रूमपान ,अन्य वस्तुओँ से इस प्रकार लिप्सित है कि वो जब स्वयं के बारे मे नही सोँच पा रहा है तो इस राष्ट्र या समाज के बारे मे क्या सोँचेगा।
हम सब आज एक सिर्फ बोझ ढो रहे है,और यही बोझ ढोते ढोते जीवन समाप्त कर देगेँ।क्यो हमारा खून नही खौलता जब देश मे घुस कर वे हमारे सीने पर वार करते है,क्यो हमारा खून नही खौलता जब कुछ राजनीतिज्ञ अपने स्वार्थ के लिए गंदी राजनीति खेलते है ;क्यो हमारा खून नही खौलता जब भारतीय परम्पराओँ ,संस्क्रति का मखौल उडाया जाता है क्योँकि हम सब सोँचते है कि ये दर्द मेरे नही लेकिन जब पत्थर अपने सिर पर पडता है तब सिर्फ हम कोसते है कभी सरकार को कभी समाज को लेकिन अपने गिरेबान मेँ कोई नही झाकना चाहता।अतः उस पत्थर का इंतजार मत करो जो न सिर्फ तुम्हारे सिर को फोडे बल्कि तुम्हारे जिगर को भी छलनी कर दे।
क्योकि वो पत्थर कभी तुम्हे विरोध करने का साहस नही जुटाने देगा।
अतः इंतजार मत करो आज खडे हो अभी खडे हो॥
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विवेक सचान"अविरल"
EE-22